हकलाहट की सरल चिकित्सा

हकलाहट का नुस्खा –
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१)  कुछ बच्चे  बड़े होने की बाद भी तुतलाकर  और अटक- अटक कर बोलते हैं |  इस समस्या के निवारण हेतु निम्न नुस्खा बेहद कारगर  साबित हुआ है –
बादाम गिरी   ५० ग्राम
दालचीनी    १० ग्राम
पिश्ता  २० ग्राम
केसर ३ ग्राम
अकरकरा    १० ग्राम
चांदी का वर्क १० ग्राम
शहद २५० ग्राम
सभी चीजों का चूर्ण बनाकर  शहद में मिलादें और किसी कांच के पात्र में भरलें  मात्रा ५ से १० ग्राम रोजाना सुबह के वक्त ४० दिन तक सेवन करें|  हकलाहट में जरूर लाभ  होता है|

२) जब कोइ हकलाकर  बोलता है  तो लोग अक्सर हंस देते हैं जो हकलाने वाले व्यक्ति के लिए अपमान जनक होता है| उसे स्नेह से समझाना चाहिए|  हकलाकर बोलने वाले बच्चे को  इस दोष से मुक्ति पाने के लिए बराबर अभ्यास कराना चाहिए| उसे कुंठित होकर बैठ जाने देना  उचित नहीं है|

३) हकलाने वाले व्यक्ति को  धीरे धीरे बोलने  का अभ्यास कराएं|  स्वर और उच्चारण पर ध्यान दें| हकलाने के बावजूद  भी उसे खूब बोलने और पढ़ने का अभ्यास कराएं|
४) बच्चे को अनावश्यक सोच विचार में न फंसने दें|

बच्चों  में हकलाकर बोलना अक्सर देखा जाता है| यह कोई  रोग नहीं बल्कि कुछ पौष्टिक तत्वों की शरीर में कमी की वजह से होता है|  हकलाहट  में निम्न जडी बूटियाँ लाभ करती हैं-

५) बच्चे को एक हरा आंवला रोज चबाने को दें|  इससे जीभ पतली होने में मदद मिलेगी  और जीभ की गर्मी भी शांत होगी|  अत: बच्चे का हकलाना बंद हो जाएगा|

6)  काली मिर्च और बादाम  प्रत्येक ७ नग लेकर  कुछ बूँद पानी में घिसकर  चटनी  बनालें|  इसमें थौड़ी  सी मिश्री मिलाकर बच्चे को चटाते रहें|  एक या दो माह में बच्चे का हकलाना बंद हो जाएगा|

7) सुबह  सवेरे  माखन  में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर चटाने  से  हकलाहट  में लाभ होता है|

8) तेजपान को जीभ के नीचे रखने से हकलाना बंद हो जाता है|

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