एेसी गर्मी में हो सकती है ये बिमारियां, बचने के लिए आजमाएं ये टिप्स

Navodayatimesगर्मी जबरदस्त रूप से दस्तक दे चुकी है, उसका उफान अभी शुरू हुआ है, जो कुछ दिन और परवान चढ़ेगा। एेसे में में तेज धुप, गर्म हवा और उमस के कारण कई तरह की स्वास्थ समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में इस मौसम में खास देखभाल की जरुरत होती है। सबसे ज्यादा इस मौसम में नुकसान त्वचा को होता है, क्योंकि यह शरीर खुला हिस्सा होता है।

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फोर्टिस हाॅस्पिटल के त्वचा विशेषज्ञ डाॅ सुनील माम के अनुसार सूर्य के तेज किरणों के कारण स्किन में जलन, खुजली और रैशेज जैसी समस्या हो जाती है। कई बार स्किन की ऊपरी लेयर हटने लगती है। सुबह 10 बजे से 3 बजे धुप बहुत तेज होता है। इतने समय में धुप में बिना किसी सुरक्षा के निकलना त्वचा के लिए खरनाक साबित हो सकता है। गर्मी में होने वाली कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं को जान  कर आप उनसे अपना बचाव कर सकते हैं।

पिट्रोस्पोरम फोलिकुलाइटिस
इसमें गर्मी के कारण माथा, चिन, बैक और चेस्ट पर लाल और चमकते हुए पिंपल्स निकल आते हैं। ज्यादातर यह समस्या किशोरों और नौजवानों में होता है। ऑयली स्किन, जिन्हें एलर्जी की समस्या हो, फीवर या अस्थमा की समस्या रहती हो, उन्हें पिट्रोस्पोरम फोलिकुलाइटिस की समस्या ज्यादा होती है।

बचाव 
– इससे बचने के लिए पसीने को त्वचा से साफ करते रहें।
– ज्यादा पसीना हो तो शॉवर ले लेना चाहिए।
– पसीने से बचने के लिए और त्वचा को साफ रखने के लिए मेडिकेटेड सोप का इस्तेमाल करें।

स्टाफ फोलिकुलाइटिस 
यह समस्या कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण होती है। हालांकि यह किसी को भी हो सकता है। सेविंग करने पर स्टाफ बैक्टेरिया हेयर फॉलिकल्स से फैलता है। इसमें हेयर फॉलिकल्स में छोटे छोटे पिंपल्स हो जाते हैं। यह लेग्स आर्मपिट्स और बियर्ड एरिया को ज्यादा प्रभावित करता हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने सेविंग किट यूज करने के बाद हमेशा अच्छे से साफ कर के सुखा कर रखें।

कई लोगों में अधिक गर्मी के कारण पसीना ज्यादा होती है। पसीना ज्यादा बनने और किसी कारण से स्वेट डक्ट्स में रुकावट के कारण बाहर नहीं निकला पाता और स्किन की निचली सतह पर फैलने लगता है। इससे स्किन में रेड रैशेज पड जाते हैं और छोटे-छोटे पिंपल्स निकल आते हैं, जिससे खुजली और जलन की समस्या होती है।

बचाव 
– चिपचिपा ऑइंटमेंट त्वचा पर ना लगाएं।
– एंटीसेप्टिक लगा सकते हैं।
– टाइट कपड़े  ना पहनें।
– समस्या हो जाने पर ऑरल एंटीबायोटिक क्लोक्सिलिन या इरिथ्रोमाइसिन लें।

सनटैन
गर्मियों में स्किन काफी संवेदनशील हो जाती है। जरा भी सन एक्सपोजर के कारण कई तरह की स्किन प्रॉब्लम हो जाती है। अल्ट्रा वायलेट रेज के डायरेक्ट संपर्क में आने से त्वचा में ड्राईनेस बढ़ जाती है, त्वचा बेजान हो जाती है और त्वचा में रिंकल्स हो जाता है। ज्यादा सनबर्न होने पर स्किन में छाले भी पड़ जाते हैं। इसके अलावा, टैनिंग से स्किन काली हो जाती है और उस पर स्पॉट्स दिखने लगते हैं। ज्यादा सन एक्सपोजर में रहने से स्किन कैंसर की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

बचाव 
– धुप में जाने से 10 -15 मिनट पहले त्वचा में अच्छी तरह से सनस्क्रीन लगाएं।
– खाने में लाइकोपीन और विटामिन ए एनालाॅग भी शामिल करें।
– अधिक से अधिक लिक्विड डाइट लें।

रोसेसिया 
रोसेसिया 30 साल से ऊपर के लोगों में होने वाली एक आम समस्या है। इसमें नोज, चिक और चिन पर रेडनेस बढ़ जाती है और स्किन ड्राई हो जाती है। कुछ लोगों में उस जगह की त्वचा कुछ उभर जाती है और प्रभावित हिस्से पर पिंपल्स निकल आता है। आम तौर पर इस समस्या से प्रभावित गोरे लोग ज्यादा होते हैं।

बचाव 
– रोसेसिया होने पर एप्पल फ्रूट मास्क लगाएं।
– ग्रीन -टी को उबाल कर फ्रिज में रख लें और कॉटन से फेस पर अप्लाई करें।
– इसके अलावा, इसे केमिकल पिल, ग्लाइकोलिक पिल और फोटो फेशियल कराया जा सकता है।

एक्ने  
स्किन में एक्ने तब होता है जब ऑयल ग्लैंड एक्टिव और अनियंत्रित तरीके से काम करती हैं।  बहुत अधिक ऑयल ग्लैंड्स के एक्टिव होने के कारण  स्किन के रोमछिद्र खुल जाते हैं, जिसके कारण एक्ने और पिंपल्स की समस्या बढ़ जाती है।

बचाव 
– इस समस्या को दूर करने के लिए कुकुम्बर, ओटमील और दही का फेस पैक लगाएं।
– सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश या क्रीम का इस्तेमाल करें।
– एक्ने पील, केमिकल पील और लेजर लाइट ट्रीटमेंट ले सकते हैं।

बॉडी ओडोर 
बॉडी में दो तरह का स्वेट ग्लैंड एक्टिव होता है। एक्राइन और एपोक्राइन। एक्राइन में किसी तरह का ओडोर नहीं होता। यह पूरे शरीर से निकलता है और बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल में रखता है, जबकि एपोक्राइन एक मोटे लेयर के रूप में स्किन पर जमा हो जाता है। यह कमर और अंडर आर्म्स के आस पास होता है। हालांकि  एपोक्राइन भी ओडोर रहित होता है लेकिन बैक्टेरिया के संपर्क में आने के बाद यह स्मेली हो जाता है।

बचाव 
– जहां ओडोर होता हो, वहां नींबू रगड़ें। कुछ देर बाद वॉश कर लें।
– हाइड्रोजन पैरऑक्साइड को पानी में मिला कर कॉटन से अंडर आर्म्स पर रगड़ें।
– डिओडरेंट और एंटी पर्सपिरेंट से भी बॉडी ओडोर को कंट्रोल किया जा सकता है,  पर्सपिरेंट में एल्युमिनियम क्लोराइड होता है जो पसीने को कम करता है।
– बोटॉक्स से  भी पसीने की समस्या की कम किया जा सकता है।

Source: navodayatimes

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