टीबी संक्रमित और क्षय रोगी में होता है फर्क

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ज्यादातर लोग जो टीबी (क्षयरोग) के बैक्टीरिया वाले माहौल में सांस लेते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी अच्छी होती है कि वे बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम होते हैं और इसे मल्टीप्लाई होने से रोक लेते हैं। इसे टीबी संक्रमण कहा जाता है। यह जरूरी नहीं कि जो लोग टीबी संक्रमित होते हैं, उन्हें क्षयरोगी कहा जाए। दूसरी ओर, अगर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बैक्टीरिया को मल्टीप्लाई होने से रोक नहीं पाती है, तो उसे एक्टिव टीबी हो जाता है। इसे हम टीबी की बीमारी कहते हैं।

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इंडियन मेडिकल एशोसिएशन (आईएमए) के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया, “टीबी से संक्रमित सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों को ही टीबी की बीमारी होती है। img

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