मोटापा, हृदय रोग, मधुमेह, उच्‍च रक्‍तचाप और अस्‍थमा के 90 फीसदी मामले ठीक कर रहे हैं स्‍वामी रामदेव

स्‍वामी रामदेव के निर्देश और आचार्य बालकृष्‍ण की देखरेख में योग-आयुर्वेद का विभिन्‍न रोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर देश में सबसे बड़ा अध्‍ययन चल रहा है। ‘पतंजलि योगपीठ’ स्थित ‘योग अनुसंधान एवं विकास विभाग’ ने योग के मनोदैहिक (मन एवं शरीर) प्रभावों का विस्तृत अध्ययन और विश्लेषण के लिए अभी तक 15 लाख लोगों को इस अध्‍ययन में शामिल किया गया है। इस प्रयोग में पतंजलि के डॉक्‍टरों व वैद्यों की टीम के अलावा विदेश की कई टीम भी शामिल है।

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इस प्रयोग के अंतर्गत देखा जा रहा है कि योग व आयुर्वेद का किस बीमारी पर कितना प्रभाव पड़ा है। इस सैंपल में कैंसर व हृदय रोग से लेकर आम संक्रामक बीमारियों से पीडि़त मरीजों तक को शामिल किया गया है।  बड़े पैमाने पर इस सर्वेक्षण के परिणाम एवं उनकी रिपोर्टों के दस्तावेजीकरण का हो चुका है और अभी भी दस्‍तावेजीकरण का बड़ा कार्य जारी है।

अभी तक देश-विदेश के करीब 15 लाख लोगों पर यह सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस अध्‍ययन में 25 से 50 आयु वर्ग के 59.12 फीसदी पुरुष एवं 40.88 फीसदी महिलाएं शामिल हुईं। योग विज्ञान के इस सर्वेक्षण में शामिल होने वाले 85.56 प्रतिशत व्यक्ति शिक्षित हैं, जिनमें से 43.69 फीसदी नौकरीपेशा वर्ग से आते हैं। सर्वे में शामिल लोगों में 57.29 फीसदी लोग शहरी एवं 42.71 फीसदी लोग ग्रामीण हैं।

अध्‍ययन में शामिल इन लोगों में 65.53 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने आस्था एवं अन्य टेलीविजन चैनल के माध्यम से स्वामी रामदेव का योग देखा, सीखा और उसे अपनाया है। वहीं 12.93 फीसदी लोगों ने बाबा रामदेव के गैर आवासीय योग शिविरों एवं 8.33 फीसदी लोगों ने आवासीय शिविर में शामिल होकर योग सीखा और उसे अपने नियमित जीवन का हिस्सा बनाया है।

योग करने वालों में से 80.88 फीसदी ने यह स्वीकार किया कि वह नियमित रूप से योग करते हैं। नियमित योग करने वालों में से 76.18 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह प्रतिदिन सुबह के समय योग करते हैं, जबकि 19.64 फीसदी लोग सुबह-शाम दोनों समय योग करने वालों में से हैं।

आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व में ‘योग अनुसंधान एवं विकास विभाग’ ने मोटापा से लेकर हृदय रोग तक और पारिवारिक जीवन से लेकर सामाजिक जीवन तक पर योग-प्राणायाम के असर का अध्ययन किया है।

अध्‍ययन में शामिल लोगों में से जिनको मोटापा की बीमारी थी, उनमें से 95.43 प्रतिशत लोगों को मोटापे में पूर्ण/आंशिक रूप से राहत मिली।

सर्वे में शामिल 18.46 फीसदी लोग उच्च रक्तचाप से पीडि़त थे। इनमें से 96.23 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि योग-प्रणायाम से उनका रक्तचाप नियंत्रित हुआ है। 22.46 फीसदी लोग अर्थराइटिस से पीडि़त थे, जिनमें से 90.80 फीसदी लोगों ने यह कहा कि उनके जोड़ों के दर्द में कमी आई है।

सर्वे में शामिल 28.42 प्रतिशत लोग मधुमेह के शिकार थे। मधुमेह के शिकार 94.99 फीसदी लोगों ने कहा कि योग-प्रणायाम के कारण उनके मधुमेह का स्तर कम हुआ है। स्वामी रामदेव कहते हैं, ‘‘ मधुमेह रोगियों को लाभ पहुंचाने में योग अत्यंत कारगर है। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि मधुमेह के कारण शरीर पर जो दूसरे विपरीत प्रभाव पड़ते हैं, उनको रोकने में भी प्रणायाम सक्षम हुआ है।’’

इस अध्ययन में शामिल होने वाले 13.48 फीसदी लोग हृदय रोग का शिकार थे। इन हृदय रोगियों में से 94.36 प्रतिशत ने कहा कि योग-प्रणायाम ने उनके जीवन में अविश्वसनीय परिणाम दिया है और उन्हें इसके कारण लाभ हुआ है।

प्रदूषण के कारण अस्थमा के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। सर्वे में भाग लेने वाले 11.53 फीसदी लोगों को अस्थमा की बीमारी थी। इनमें से 95.77 फीसदी ने यह स्वीकार किया कि जबसे उन्होंने योग-प्रणायाम को अपनाया है, तब से उन्हें अस्थमा का अटैक पड़ना बंद या फिर कम हो गया है। इसी प्रकार 93.67 फीसदी लोगों ने गुर्दा रोग में, 94.91 ने स्पाॅण्डीलाइटिस में, 93.67 फीसदी ने यकृत/ उदर रोग में एवं 91.71 फीसदी ने चर्म रोग में योग-प्रणायाम से पूर्ण या आंशिक लाभ की बात को स्वीकार किया।

Source: aadhiabadi

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