रंगो का मजा लेते हुए ऐसे रखें अपनी स्किन और बालों का ख्याल

Holi Special 2017: रंगो का मजा लेते हुए ऐसे रखें अपनी स्किन और बालों का ख्याल - India TV

इस आधुनिक युग की होली में प्रयोग किए जाने वाले सूखे गुलाल तथा गीले रंगों को प्राकृतिक उत्पादों से नहीं बनाया जाता बल्कि उनमें माईका, लेड जैसे रसायनिक पदार्थ पाए जाते है, जिससे त्वचा में न केवल जलन पैदा होती है, बल्कि यह सब खोपड़ी पर जमा भी हो जाते हैं।

Loading...

होली का त्योहार ज्यादातर खुले आसमान में खेला जाता है, जिससे सूर्य की गर्मी से भी त्वचा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। खुले आसमान में हानिकाक यू.वी. किरणों के साथ-साथ नमी की कमी की वजह से त्वचा के रंग में कालापन आ जाता है। होली खेलने के बाद त्वचा निर्जीव बन जाती है।

Loading...

रंगों का त्योहार होली देशभर में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन रंगों से बाल खराब होने और त्वचा में जलन होने का खतरा भी बना रहता है, इसलिए होली खेलते वक्त कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। Holi Special 2017: रंगो का मजा लेते हुए ऐसे रखें अपनी स्किन और बालों का ख्याल - India TV

Next post:

Previous post:

0 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap