कैंसरग्रस्त बच्चों की मांओं का सहारा व उम्मीद बनीं माएं

कैंसरग्रस्त बच्चों की मांओं का सहारा व उम्मीद बनीं माएं - India TV

सोनल शर्मा को उन्नीस साल पहले अपनी दो वर्षीय बेटी गुनगुन के रक्त कैंसर का शिकार होने का पता चला था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दो साल से भी ज्यादा उसका इलाज चला। जिंदगी के इस कठिन दौर से गुजरने के बाद सोनल के पति अनुराग ने उनसे कहा कि इस सबसे से जूझने के बाद वह या तो उनकी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए ईश्वर को धन्यवाद देकर केवल अपने घर जा सकते हैं या अपने जैसे अन्य मां-बाप का सहारा बनने का प्रण ले सकते हैं। यही वह समय था, जब सोनल ने अपनी बेटी की तरह अन्य कैंसरग्रस्त बच्चों के मां-बाप की तकलीफ बांटने का फैसला किया।

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सोनल ने कहा, “अपनी बेटी के इलाज के दौरान मुझे कोई भी ऐसा नहीं मिला, जो मेरा हाथ थाम कर कहे कि सब कुछ ठीक हो जाएगा।” सोनल ने इसके बाद खुद भी कैंसर की जंग जीतने वाली पूर्व नौकरशाह पूनम बगई के साथ मिलकर जनवरी 2004 में भारतीय कैंसर सोसायटी के अधीन एनजीओ ‘कैनकिड्स किड्सकैन’ शुरू किया। कैंसरग्रस्त बच्चों की मांओं का सहारा व उम्मीद बनीं माएं - India TV

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