खासबात ये है कि इलाज के दौरान मरीज को न तो कोई दवा खानी है और न उसे साइड इफैक्ट का डर है. इलाज का खर्च करीब पांच हजार रुपए आता है. इलाज करीब तीन से चार माह में हो जाता है. सफेद दाग से पीड़ित मरीज को प्लेटलेट ग्लू (प्लेटलेट रिच प्लाज्मा या कॉर्ड ब्लड इनफ्यूजन) के माध्यम से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. 29 नवंबर से विशेषज्ञों ने इस पद्धति से तीन मरीजों का इलाज शुरू किया था. एक मरीज पूरी तरह ठीक हो चुका है, जबकि दो मरीजों की त्वचा पर सफेद दाग की जगह स्वाभाविक रंग की त्वचा बनना शुरू हो गई है.

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विशेषज्ञों का दावा है कि एम्स में यह पद्धति अभी रिसर्च स्तर पर चल रही है. सबसे पहले उन्होंने इस पद्धति से इलाज शुरू किया है. इलाज की ये पद्धति जेएएच के ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. डीसी शर्मा और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. खोजेमा सैफी ने मिलकर ईजाद की है.

अभी ऐसे होता है इलाज

अभी तक विटिलिगो नामक बीमारी का इलाज डर्मेटोलॉजिस्ट टॉपिकल थैरेपी, सिस्टमिक थैरेपी तथा अल्ट्रावॉयलेट किरणों की सिकाई के माध्यम से करते हैं. स्टेरॉयड, सोरालेल, इम्यून सिस्टम को रोकने वाली जो दवाएं रोगी को दी जाती हैं उसके साइड इफैक्ट भी मरीज को झेलने पड़ते हैं.

क्यों हो जाती है त्वचा सफेद

सामान्यत: त्वचा का रंग मेलोनोसाइट कोशिका एवं उससे बनने वाले मेलेनिन पर निर्भर करता है. इन दोनों के नष्ट होने पर त्वचा का प्रभावित हिस्सा सफेद हो जाता है.

ऐसे काम करती है नई पद्धति

जहां सफेद दाग होते हैं वहां प्लेटलेट्स को इंजेक्ट कर दिया जाता है. इसके बाद उस हिस्से को कवर कर तीन दिन के लिए छोड़ दिया जाता है. प्लेटलेट्स में ग्रोथ फैक्टर और स्टेम सेल होते हैं. प्लेटलेट्स में ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो शरीर के जिस हिस्से में जाएं उसी के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं. ये प्लेटलेट्स मरीज की मृत हो चुकी मेलोनोसाइट नामक कोशिका को पुन: जीवित कर मेलानिन नामक तत्व बनाने लगती है जो त्वचा को स्वाभाविक रंग देती है. रोगी को धूप में बैठने के लिए भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्य की किरणें मेलानिन बनाने में सहयोग करती हैं.

रोगी को नहीं होता कोई साइड इफेक्ट

इस पद्धति से तीन मरीजों का इलाज चल रहा है उन्हें काफी लाभ है. सफेद दाग की जगह पर स्वाभाविक रंग आने लगा है. यह पद्धति कारगर है और इसमें रोगी को दवा नहीं लेनी पड़ती और न ही किसी भी तरह का साइडइफेक्ट होता है. डॉ. खोजेमा सैफी, डर्मेटोलॉजिस्ट

मृत कोशिकाओं को कर देते हैं पुनर्जीवित

प्लेटलेट्स में ग्रोथ फैक्टर और स्टेम सेल होते हैं. प्लेटलेट्स मरीज की मृत हो चुकी मेलोनोसाइट नामक कोशिका को पुनर्जीवित कर देती है. अभी रोगियों का इलाज ब्लड बैंक में आने वाले ब्लड से निकाले गए प्लेटलेट्स से किया जा रहा है. गर्भ नाल (कॉड ब्लड) से निकाले गए प्लेटलेट्स और भी कारगर हैं. डॉ. डीसी शर्मा, ब्लड बैंक, इंचार्ज जेएएच समूह

Source: palpalindia

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