इस फल को खाने से उतर जाता है चश्मा, दूर हो जाता है गंजापन

ग्रामीण, आदिवासी और वन अंचलों के नजदीक रहने वाले लोग हमेशा से विभिन्न प्रकार की वन संपदाओं को ही अपना आहार अंग बनाए हुए हैं। एक तरफ हमारे गांव और जंगल हैं, वहीं दूसरी तरफ तथाकथित विकसित समाज है जिसने ज्यादा विकसित होने की दौड़ में अपने लालन-पालन में पोषक तत्वों को कहीं खो दिया है। आदिवासियों का आहार पूर्णत: प्रकृति आधारित होता है और मौसम तथा जलवायु के अनुरूप बदलता भी रहता हैं। कुपोषण आज विश्व की एक बेहद खतरनाक समस्या है, अनेक बच्चों की अकाल मौत का कारण सिर्फ कुपोषण ही है। अमेरिकी संस्थानों में तो भारतीय आदिवासियों के व्यंजनों और आहारों पर निरंतर शोध भी जारी है और वैज्ञानिक इस बात से भी सहमत है कि ये आहार पोषक तत्वों की भरमार लिए हुए हैं। आइए हम भी जाने ऐसे कुछ आहारों को जो हम सभी के बेहतर सेहत के लिए रामबाण साबित हो सकते हैं।
इस फल को खाने से उतर जाता है चश्मा, दूर हो जाता है गंजापन
– कुन्दरू के फल में कैरोटीन प्रचुरता से पाया जाता है जो विटामिन ए का दूत कहलाता है। कुन्दरू में कैरोटीन के अलावा प्रोटीन, फाईबर और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व भी पाए जाते है। गुजरात के डांगी आदिवासियों के बीच कुंदरू की सब्जी बड़ी प्रचलित है। इन आदिवासियों के अनुसार इस फल की अधकच्ची सब्जी लगातार कुछ दिनों तक खाने से आंखों से चश्मा तक उतर जाता है साथ ही माना जाता है कि इसकी सब्जी के निरंतर उपभोग से बाल झडऩे का क्रम बंद हो जाता है, गंजेपन से भी बचा जा सकता है।

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