हाइपो-हायपर थायराइड के लक्षण और घरेलू उपचार

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भागदौड़ वाली इस जिंदगी में हम लोग इतने बिजी हो गए हैं कि अपनी सेहत का ध्यान भी ढंग से नहीं रखते। समय की कमी के चलते बाहर के खाने को ज्यादा प्रैफर कर रहे हैं साथ ही खा पीकर एक जगह पर बैठ जाते हैं। ना कोई एक्सरसाइज करते हैं और ना कोई डाइट प्लान फोलो करते हैं, जिसकी वजह से मोटापा हमें अपना शिकार बना रहा है। इसके अलावा एक बीमारी और जो बहुत ही आम सुनने को मिल रही है वो हैं थायराइड।

थॉयराइड तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो गले में पाई जाती है। यह ग्रंथि उर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है। यह एक तरह के मास्टर लीवर की तरह है जो ऐसे जीन्स का स्राव करती है जिससे कोशिकाएं अपना कार्य ठीक प्रकार से करती हैं। इस ग्रंथि के सही तरीके से काम न कर पाने के कारण कई तरह की समस्‍याएं होती हैं। थायराइड दो प्रकार का होता है, पहला हाइपोथायराइड एवं दूसरा हायपरथायराइड।

हाइपोथायराइड 

हाइपो थायराइड से वजन बढ़ने लगता है। शरीर में सुस्ती पड़ती है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। दरअसल, इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता जिससे शरीर में आवश्यकतानुसार टी.थ्री व टी. फोर हार्मोन नहीं पहुंच पाता है। यह रोग 30 से 60 वर्ष के अंतर्गत लोगों को होता जिसकी ज्यादा शिकार महिलाए ही होती है।

लक्षणः

-पैरो में सूजन

-आंखों में सूजन

-पीरियड प्रॉब्लम

-डिप्रैशन

-आवाज रूखी व भारी

हायपरथायराइड 

इसमें ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता हैं और टी. थ्री, टी. फोर हार्मोन अधिक मात्रा में निकलकर रक्त में घुलनशील हो जाता है। वजन अचानक ही कम हो जाता है। यह 20 साल के लोगों को होता है ज्यादा महिलाएं ही इसकी शिकार होती है।

लक्षण

-भूख में वृद्धि

-मांसपेशिया कमजोर

-धड़कन तेज

-गर्भपात होना

– अधिक पसीना आना

जांच व उपचार

थायराइड के दोनों प्रकार में ब्लड टैस्ट किया जाता है। ब्लड में टी. थ्री, टी. फोर एवं टी. एस. एच. लेवल में सक्रिय हार्मोंस का लेवल जांचा जाता है। थायराइट रोगियों को उम्र भर दवा खानी पड़ती है, किंतु पहले चरण में उपचार करा लेने से ज्यादा परेशानियां नहीं आतीं। मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। ऐसी चीजें न खाएं, जिससे थायराइड से पैदा होने वाली परेशानियां और बढ़ जाएं।

इनसे करें परहेज

-आयोडीन वाला खाना

-कैफीन

-रेड मीट

-एल्कोहल

-वनस्पति घी

अखरोट और बादाम खाएं

अखरोट और बादाम के सेवन से थॉयराइड के कारण गले में होने वाली सूजन को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। अखरोट और बादाम सबसे अधिक फायदा हाइपोथॉयराइडिज्‍म (थॉयराइड ग्रंथि का कम एक्टिव होना) में करता है। इसके साथ में रात को सोते समय गाय के गर्म दूध के साथ 1 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करें। एक बार डाक्टरी सलाह जरूर ले लें।

Source: punjabkesari

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