स्वाइन फ्लू के लिए घरेलू नुस्ख़े

स्वाइन फ्लू ने पहले मैक्सिको में अपना पांव पसारा, उसके बाद पूरे अमेरिका और भारतीय उप महाद्वीप में फैलते हुए महामारी का रुप ले लिया। अंग्रेजी में एक कहावत है न – “Prevention is better than cure”। स्वाइन फ्लू में भी बचाव ही एक मात्र इलाज है। स्वाइन फ्लू का वायरस सीधे श्वास नली पर आक्रमण करता है और यह खतरनाक रुप से संक्रामक हो जाता है।
खास कर H1N1 वाइरस जो कि जानलेवा भी है और काफी संक्रामक भी। यह बच्चे, जवान और बूढ़े किसी पर भी अटैक कर सकता है और काफी तेजी से फैलता है। मौसमी सर्दी-कफ और खांसी में छींकने-खांसने के दौरान इसके वायरस हवा में तैरने लगते हैं। इसके वायरस दरवाजे, सिंक, खिड़की, कपड़े, रूमाल, तौलिया या कहीं पर भी हो सकते हैं। इसके संपर्क में आते ही कोई भी संक्रमण का शिकार हो सकता है।

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जरुरी नहीं है कि H1N1 वायरस के संक्रमण के तुरंत बाद कोई बीमार पड़ जाए। सात दिन के बाद भी इसके लक्षण दिखाई देते हैं और मरीज बीमार पड़ने लगता है। बच्चों में 10 दिन के बाद भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके लक्षण सीजनल फ्लू की तरह ही होते हैं, मसलन- कफ, बुखार, गला सूखना, नाक बहना, छींक आना, सिरदर्द, बदन दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार आना और बदन में अकड़न होना।
स्वाइन फ्लू में निमोनिया का खतरा रहता है और श्वसन प्रणाली नाकाम होने का डर रहता है जोकि जानलेवा है। स्वाइन फ्लू पिछले साल भारत में महामारी की तरह पांव पसारा, खासकर गुजरात, राजस्थान में इससे कई लोगों की मौत भी हुई।
मगर इससे घबराने की जरुरत नहीं है। अगर आप इससे बचाव के लिए तुरंत उपाय करना शुरु कर देते हैं तो यह उतना खतरनाक नहीं हो सकता है।
स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies for Swine Flu – H1N1)
तुलसी (Basil)
तुलसी में रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करने की शक्ति होती है और किसी भी तरह के फ्लू में यह रामबाण की तरह काम करता है। यह गले और फेफड़े को किसी भी तरह के संक्रमण से बचाता है। सुबह खाली पेट 5-10 तुलसी के पत्ते को अच्छी तरह से धो कर चबा लें। चाय और काढ़े में भी तुलसी का सेवन कर सकते हैं।
गिलोय (Tinospora Cordifolia)
गिलोय का पौधा आसानी से हर जगह मिल जाता है। गिलोय के पौधे का तना काटकर उसे अच्छी तरह से छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। गिलोय के तना के टुकड़े और पांच-छह तुलसी के पत्तों को पानी में उबाल लें। अब इसमें काली मिर्च, सेंधा नमक या काला नमक मिला लें और इसे गरमा-गरम काढ़े की तरह पी लें। यह आपके रोग से लड़ने की क्षमता को तो मजबूत करेगा ही, संक्रमण से भी रक्षा करेगा।
कपूर (Camphor)
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कपूर काफी कारगर है। वयस्क महीने में एक बार या दो बार फ्लू के सीजन में इसका सेवन कर सकता है। जवान लोग तो इसे पानी के साथ भी खा सकते हैं लेकिन बच्चों को केले में कपूर मथ कर खाने देना चाहिए। बच्चे सीधे कपूर नहीं खा सकते। ध्यान रहे कपूर का सेवन हर रोज न करें। फ्लू के सीजन में एक या दो बार ही इसका सेवन काफी है।
लहसुन (Garlic)
लहसुन तो वैसे भी हर मर्ज की दवा है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और संक्रमण का खतरा कम रहता है। रोज सुबह खाली पेट लहसुन की दो डली कच्चा ही पानी के साथ खाएं, काफी फायदा करेगा।
हल्दी-दूध (Turmeric with Milk)
हल्दी में कई तरह के गुण होते हैं। दर्द निवारक के साथ-साथ यह कफ-खांसी-सर्दी में तो असर करता ही है, रोग प्रतिरोधी क्षमता को भी मजबूत करता है। रोज रात को गर्म दूध में हल्दी डाल कर पीने से फ्लू और संक्रमण का खतरा कम रहता है।
साफ-सफाई (Hygine)
वायरल संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है और वायरस कहीं भी हो सकता है। किसी भी चीज को छूने या कहीं बाहर जाने के बाद तुरंत पानी और एंटी सेप्टिक लोशन या लिक्विड से हाथ पैर धोने के बाद ही कुछ खाना-पीना चाहिए। सीजनल फ्लू के महीनों में नाक पर मास्क या रुमाल लगा कर बाहर निकलना चाहिए।

Source: raftaar

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