मूत्र असंयमिता का योग द्वारा उपचार

अनियंत्रित मूत्राशय की समस्या, आज के दौर में महिलाओं एवं पुरुषों में कई तरह के मूत्र सम्बन्धी समस्याएं (mutra sambandhi rog) उत्पन्न हो रही हैं। इन परेशानियों से बचने के लिये कुछ लोग पारंपरिक दवाएं लेते हैं तो कुछ लोग घरलू उपचार पद्धति को अपनाते हैं। मूत्र असंयम के कारण, मूत्र असंयमिता, महिलाओं में पायी जाने वाली एक आम समस्या बन चुकी है जो लगभग हर उम्र की महिलाओं में देखने को मिलती है। बदलती हुई आधुनिक जीवन शैली की वजह से 20 से 39 वर्ष की आयु वाली महिलाओं भी इससे प्रभावित हैं।

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मूत्र पथ के संक्रमण, लेकिन इस परेशानी का प्राकृतिक तरीको और योग के माध्यम से इलाज किया जा सकता है। कई वर्षों से लोग योग द्वारा अपने मूत्राशय को स्वस्थ रखते आ रहे हैं। 100 से भी अधिक वर्षों पुरानी योग पद्धति ने यह साबित कर के दिखाया है।मूत्र असंयमिता के लिए योग के प्रकार (Types of Yoga for urinary incontinence)

मूत्र असंयम – मूल बन्ध (Mula Bandha)

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प्राचीन रहस्यों में से एक है मूल बन्ध। इसके लिए लोगो में शर्त लगाई जाती थीं लेकिन कई सालों तक योग का अभ्यास करने वाले भी इसके लिए काबिल नहीं होते थे। सिर्फ उचित तकनीक और अभ्यास के द्वारा ही इसे सीखा जा सकता है। प्राचीन काल की गुरु-शिष्य परंपरा के द्वारा यह तकनीक लोगो तक पहुँचती आ रही है । इस आसन में वायु को ऊपर की ओर खींच कर रोक लिया जाता है और मलाशय को अन्दर की तरफ खींचकर बन्ध लगाया जाता है।

मूलबंध के चरण (Follow the steps to do Mula Bandha)

चरण 1: पेसाब करने के लिये जाएँ और बीच में ही इसे किसी भी तरह रोक लें।

चरण 2 : किसी शांत जगह पर सुखासन में बैठें, ध्यान रहे रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।

चरण 3 : पूरे पेल्विक फ्लोर को सिकोड़ें और साथ ही गुदा को भी अन्दर की ओर खींचे।

चरण 4 : 3 सेकेण्ड के लिए मूलाधार चक्र की ऊर्जा पर ध्यान केन्द्रित करें।

चरण 5 : सभी माशपेशियों को ढीला छोड़ दें और फिर दोबारा 3, 4 और 5 चरण को 10 बार दोहरायें।

योग व्यवहार मूत्र असंयमिता के लिए (Yoga treats for urinary incontinence – mutra sambandhi rog)

बॉटम लाइन आसन (Bottom line asana)

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इस आसान के अंतर्गत कई प्रकार की योग की मुद्राएं शामिल हैं, जो मूत्र निकलने की समस्या से दूर रहने में आपकी सहायता करेगी। इस लेख में इन मुद्राओं पर चर्चा की गयी है। तीन मुख्य मुद्राएं, त्रिकोणासन यानि त्रिभुज की मुद्रा, उत्कटासन यानि कुर्सी की मुद्रा तथा मूल बंध यानि जड़ को बंद करना मूत्र असंयमिता की समस्या को दूर करने के काफी प्रभावी आसान सिद्ध होते हैं। अगर आप इन आसनों को सही प्रकार से कर नहीं पा रहे हैं तो किसी योग शिक्षक से संपर्क करें। योग की ये तीनों ही मुद्राएं आपकी मूत्र आधारित समस्याओं को दूर करने में काफी कारगर साबित होती हैं।

सूर्य नमस्कार (Surya namaskara)

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कई ऐसे योगी हैं, जो रोज़ाना योग की मुद्राओं का अभ्यास करते हैं। इनमें से एक मुद्रा, सूर्य नमस्कार का व्यायाम आपकी मूत्र आधारित परेशानियों को हल करने का काफी असरदार योगासन होता है। अगर आप रोज़ाना सुबह इस आसन का अभ्यास कर सकें तो आप अपने मूत्र निकलने के अंतराल पर काबू कर सकते हैं। इससे आपके मूत्राशय में मूत्र जमा रहता है और आपको इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। सूर्य नमस्कार के आसन को सही प्रकार से करने के लिए आपके लिए किसी अच्छे योग शिक्षक की मदद लेना काफी आवश्यक है।

केगल व्यायाम (Kegel exercise)

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केगल व्यायाम मूत्र के गलत समय पर निकलने की समस्या को दुरुस्त करने का एक काफी प्रभावी माध्यम होता है। ज़्यादातर लोगों ने दवाइयों के प्रयोग और सामान्य उपचार के अलावा इस विधि को मूत्र रोकने की विधा में काफी फायदेमंद पाया है। इस विधि के अंतर्गत PFM को भी निचोड़ा जाता है, जिससे मूत्र के निकलने की समस्या में काफी सुधार आता है।  वैसे तो इस स्वास्थ्य समस्या के कई कारण हैं, पर यह असाध्य बिलकुल भी नहीं है। अगर आप इन स्वास्थ्यकर आदतों का अच्छे से पालन कर लेते हैं तो मूत्र आधारित समस्याओं से निपटना आपके लिए काफी आसान हो जाएगा।

Source: hinditips

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