व्यक्ति का आइना होती है मस्तिष्क रेखा

मस्तिष्क रेखा हथेली की महत्वपूर्ण रेखा है। मस्तिष्क रेखा का उदय गुरु और जीवन रेखा के बीच कहीं से भी हो सकता है। यह रेखा मनुष्य के मेधा के बारे में बताती है। व्यक्ति का चिंतन कैसा होगा, उसके आदर्श कैसे होंगे। मस्तिष्क रेखा व्यक्ति की विचारधारा की ओर इशारा भी करती है। उसकी किस क्षेत्र में रूचि रहेगी, यह भी मस्तिष्क रेखा से पता चलता है। जानिए मस्तिष्क रेखा कैसे व्यक्ति का आइना होती है।

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-जब मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से निकलकर विचित्र बिन्दु पर अलग होकर स्वतंत्र चलती है, तो वह बिन्दु मनुष्य की मानसिकता का प्रभावी होने का बिन्दु होता है।

व्यक्ति का आइना होती है मस्तिष्क रेखा

-जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा द्वारा बनने वाला कोण जितना बड़ा होगा, मनुष्य उतना ही स्वतंत्र और संवेदनशील होगा। उसका मस्तिष्क जरा-जरा सी बातों से प्रभावित होगा।

-जीवन रेखा से स्वतंत्र आरम्भ होने वाली मस्तिष्क रेखा उसकी विचारधारा अधिक स्वतन्त्र करती है। ऐसे व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि, स्पष्ट चिंतन, व्यवहारिक और आदर्शों वाले होते हैं।

-निम्न मंगल से आरम्भ होने वाली मस्तिष्क रेखा अस्थायी और परिवर्तनशीलता की प्रवृति उत्पन्न करती है। ऐसे लोग क्रोधी और झगड़ालू भी होते हैं। गुरू पर्वत से शुरु होने वाली मस्तिष्क रेखा के लोग महत्वाकांक्षी, तर्कपूर्ण,प्रतिभाशाली, नायक एवं शक्तिवान मस्तिष्क के होते हैं।

-सीधी और स्पष्ट मार्ग वाली मस्तिष्क रेखा के स्वामी सतर्क, व्यवहारिक और सुलझे हुए व्यक्ति होते हैं। ये प्राय: दूसरे के प्रभाव में कभी नहीं आते। इनके मित्रों की संख्या कम होती है तथा ये कभी-कभी अपने आप में संकुचित होते हैं एवं इनकी विचार प्रणाली अति मौलिक होती है।

-शनि की ओर झुकने वाली मस्तिष्क रेखा धर्म और संगीत कला के प्रति रुचि उत्पन्न करती है।

-अगर सम्पूर्ण शीर्ष रेखा ढलान लिये हुए हो तो साहित्य, चित्रकारी, कलपुर्जे के आवष्किार की कल्पना शक्ति पायी जाती है तथा कल्पना शक्ति की सहायता से साहित्य के क्षेत्र में सफलता भी प्राप्त करता है।

Source: livehindustan

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