अमृत से कम नहीं है गिलोय, हर बीमारी की ये है दवा!

उपचार की वैकल्पिक कही जाने वाली पद्धतियां, वास्तव में प्राथमिक हैं। इन पद्धतियों की औषधियों और उपचारों में बहुधा ऐसे तत्वों व जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है, जो हमारे आसपास प्रकृति में आसानी से मिल जाते हैं। आयुर्वेद में ऐसे ही एक चमत्कारिक जड़ी-बूटी है – गिलोय, जैसा नाम, वैसा कामआयुर्वेद में गिलोय को अमृत बेल भी कहा जाता है। कारण है, न तो यह खुद मरती है और न ही सेवन करने वाले को कोई रोग होने देती है। गिलोय का सेवन किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। यह चमत्कारिक जूड़ी-बूटी दस्त जैसे सामान्य से लेकर डेंगू व कैंसर जैसे प्राण घातक रोगों में भी बहुत लाभदायक है। dयह भारत में 1 हजार फीट की ऊंचाई तक सर्वत्र पाई जाती है।

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