स्वाइन फ्लू और नॉर्मल फ्लू में फर्क ऐसे पहचानें

स्वाइन फ्लू और नॉर्मल फ्लू में फर्क ऐसे पहचानें

स्वाइन फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को स्वाइन फ्लू के मामलों की संख्या 60 तक पहुंच गई और इससे अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए क्या करें जानिए…

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स्वाइन फ्लू और नॉर्मल फ्लू में फर्क
-स्वाइन फ्लू नॉर्मल फ्लू से कम खतरनाक है।
– स्वाइन फ्लृ में पेट में दर्द, उल्टी, डायरिया और उल्टी आने जैसा आभास होता है, जबकि नॉर्मल फ्लू में ऐसा नहीं होता।
– स्वाइन फ्लू में मासपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द होने लगता है, लेकिन नार्मल फ्लू में ऐसा नहीं होता है।
– स्वाइन फ्लृ और नॉर्मल फ्लू दोनों में ही खांसी, जुकाम, गले में खराश होने लगती है।
– दोनों में ही 100 से ज्यादा बुखार होता है।
– अगर मरीज को बुखार न हो तो उसे कोई सा भी स्वाइन फ्लू नहीं है। उसे एजलीर् के कारण खांसी या जुकाम हो सकता है।
तीन तरह का स्वाइन फ्लू
1 मॉल्ड और अन कॉम्प्लिकेटेड स्वाइन फ्लू : इसमें मरीज की सांस नहीं फूलती है, लिहाजा टेस्ट कराने, दवा लेने और अस्पताल में एडमिट होने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ सावधानियां अपनाकर इस तरह के स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।
2. प्रोग्रेसिव साइन फ्लू : इस तरह के स्वाइन फ्लू में सांस नहीं फूलती, बेहोशी की हालत नहीं होती।
3. सीवियर एंड कॉम्प्लिकेटेड स्वाइन फ्लू : इसमें बेहोशी की स्थिति होने लगती है, सांस फूलने लगती है, बीपी कम हो जाता है, सांस की गति बढ़ जाती है। मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या करें
-खांसी, बुखार व जुकाम होने पर ऑफिस न जाएं, बच्चे स्कूल ना जाएं।
-खांसी जुकाम होने पर 3 फुट दूर होकर बात करें।
-खांसी जुकाम या स्वाइन फ्लू होने पर मुंह पर साधारण सजिर्कल मास्क लगाएं।
-नॉर्मल लोगों को यह मास्क लगाने की जरूरत नहीं है।
-अगर 5 साल से कम हैं या 65 साल से ज्यादा हैं और जुकाम या खांसी है तो जांच कराएं।
-गर्भवती महिलाएं, किडनी, डायबिटीज, दिल के बीमार लोगों को अगर फ्लू है तो जांच कराएं।
-रुमाल, कपड़े या हाथ में ना छींके व खासें, अपनी बाजू की ओर छींके।
-हाथ अच्छी तरह से धोएं।
(जानकारी इंडियन मेडिकल असोसिएशन के वाइस प्रेजिडेंट (इलेक्टेड) डॉ. के. के. अग्रवाल से बातचीत पर आधारित)
दिल्ली-एनसीआर में यहां हैं स्वाइन फ्लू के खास इंतजाम
सरकारी हॉस्पिटल
जीटीबी अस्पताल (दिलशाद गार्डन), संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (मंगोलपुरी), 3. लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल (खिचड़ीपुर), लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल (दिल्ली गेट), दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (हरि नगर), मदनमोहन मालवीय अस्पताल (मालवीय नगर), बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल (रोहिणी), चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय (गीता कॉलोनी), भगवान महावीर अस्पताल (पीतमपुरा), महषिर् वाल्मीकि अस्पताल (पूठ खुर्द), बापू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल (जहांगीरपुरी), अरुणा आसिफ अली अस्पताल (राजपुर रोड), डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल (बाबा खड़क सिंह मार्ग), सुचेता कृपलानी अस्पताल (पंचकुइयां रोड), सफदरजंग अस्पताल, एयरपोर्ट अस्पताल, बाड़ा हिंदूराव अस्पताल
प्राइवेट अस्पताल
एक्शन बालाजी अस्पताल (पश्चिम विहार), अपोलो अस्पताल (मथुरा रोड), मूलचंद अस्पताल (रिंग रोड लाजपत नगर), सर गंगा राम अस्पताल (राजेंद नगर), सेंट स्टीफन अस्पताल (तीस हजारी)
यहां है टेस्ट की सुविधा
डॉ. लाल पैथ लैब, डैंग्स लैब, एसआरसीसी लैब, एयुरोप्रोब लैब, पटेल चेस्ट, एम्स, एनसीडीसी
Source: ann24x7
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