ध्यान में होने वाले अनुभव

ध्यान के अनुभव निराले हैं। पहले भाग में हम लिख आए हैं कि ध्यान के शुरुआती अनुभव कैसे होते हैं। जब मन मरता है तो वह खुद को बचाने के लिए पूरे प्रयास करता है। जब विचार बंद होने लगते हैं तो मस्तिष्क ढेर सारे विचारों को प्रस्तुत करने लगता है। ध्यान में कई तरह के भ्रम उत्पन्न होते हैं लेकिन उन सभी के बीच साक्षी भाव में रहकर जाग्रत बने रहने से धीरे-धीरे सभी भ्रम और विरोधाभास हट जाते हैं।

Loading...

Next post:

Previous post:

0 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap