– मन मुताबिक काम होने तक खुशी को न टालें –

‘मन मुताबिक काम होने तक खुशी को न टालें’

जीवन मिला है, खुश रहने के लिए। यहां बीतते एक-एक पल का मजा लेना है, न जाने कौन सा पल आखिरी हो जाए। खुशी को नहीं टालें कि कल जब मन मुताबिक कुछ होगा, तब खुश हो जाऊंगा। कल पर टालने के कारण हम आज खुश नहीं रह पाते।

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असलियत में खुशी हमारा स्वभाव है, यह खुशी हम कहीं बाहर से नहीं लाते, बल्कि हमारे भीतर ही खुशी की लहर हमेशा दौड़ती रहती है। छोटे-छोटे दुखों और समस्याओं को हम इतना बड़ा बना देते हैं, जिससे हमारी खुशी कहीं खो जाती है। हम चाहने लगते हैं कि दूसरे मुझे खुशी दें। पति चाहता है कि पत्नी उसे खुशी दे। पत्नी भी पति से खुशी चाहती है। ‘मन मुताबिक काम होने तक खुशी को न टालें’

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