खानपान में विविधता रखें वरना मधुमेह, मोटापा

एक नए अध्ययन से जानकारी मिली है कि खानपान में विविधता की कमी के कारण मनुष्य की आंतों में जीवाणुओं का पारिस्थितिकी तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे टाइप 2 मधुमेह और मोटापे का खतरा बढ जाता है। यह शोध मोलेक्युलर मेटाबॉलिज्म जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन से जानकारी मिली है जिसमें लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने भोजन में विविध प्रकार के खाद्य पदाथोंü को शामिल करें।

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पिछले 50 सालों में खेती के तरीके में बदलाव के कारण कृषि विविधता कम हुई है जिसके नतीजे में हमारे खानपान में भी विविधता घट गई है। अमेरिका के बॉयोमेडिकल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं के दल का कहना है,एक स्वस्थ मनुष्य की आंत में विविध किस्म के जीवाणु पाए जाते हैं लेकिन जीवाणुओं की विविधता में कमी आने से टाइप-2 मधुमेह, मोटापा और पेटदर्द जैसी बीमारियां बढने लगती है।

पेट में पाए जाने वाले जीवाणुओं का काम मुख्य रूप से पाचन में सहायता करना है और खाए भोजन से विभिन्न किस्म के पोषण को प्राप्त करने मदद करना है। इन जीवाणुओं की विविधता में नुकसान के नतीजे कई किस्म को रोगों के रूप में सामने आ सकते हैं। जितना ज्यादा विविधता से भरपूर हमारा भोजन होगा, उतनी ही विविधता हमारे आंत में स्थित जीवाणुओं में होगी।

Source: khaskhabar

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