धुआंरहित तंबाकू के सेवन से घुट रहा है भारत का दम

भारत में लागातार धुआंरहित तंबाकू के सेवन करने से हर साल 15 वर्ष व उससे ज्यादा की उम्र के करीब 35 फीसदी लोगों की मौत होती है। इनमें पुरुषों की संख्या करीब 48 फीसदी और महिलाओं की 20 फीसदी है। भारत में करीब 20 करोड़ लोग धुआंरहित टोबैको (स्मोकलेक टोबैको) का सेवन करते हैं। ये आंकड़ा दुनिया भर में स्मोकिंग पर रोकथाम की कोशिशों में जुटे विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) के लिए चिंता का विषय है। इस भयावह तस्वीर से अगर अब भी हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में भारत में तंबाकू के सेवन से मरने वालों की संख्या और भी भयानक रुप ले सकती है।

Loading...

भारत में खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग विभिन्न तरीकों से धुआंरहित तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें खैनी, पान मसाला, गुटखा आदि शामिल हैं, जोकि सीधे तौर पर कैंसर पैदा करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

Next post:

Previous post:

0 Shares
Share via
Copy link
Powered by Social Snap