ये है आज का ‘श्रवण’

आज के इस कलयुग में ऐसी संतान बहुत कम मिलती है जो अपने मां और बाप की सेवा करती है। अक्सर देखा जाता है कई परिवारों चंद पैसों के लालच में अपने ही माता-पिता के साथ घिनोनी करतूत को अंजाम देते है। लेकिन एमपी के जबलपुर जिले में रहने वाले कैलाश गिरी अपनी बुजुर्ग मां को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा करा रहे हैं।

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आज के दौर में भले ही यह सब बेमानी लगे, लेकिन कलियुग के इस श्रवण कुमार देखकर राह चलते लोग श्रद्धा से सिर झुका रहे हैं। दरअसल, कैलाश गिरी पिछले 20 वर्षों से अपनी मां को कांवड़ के सहारे कंधों पर उठाकर तमाम तीर्थों की यात्रा करा चुके हैं। अब वे मां को लेकर वृंदावन यात्रा पर निकले हैं।

कैलाश ने बताया कि, वे सबसे पहले 2 फरवरी 1992 को मां कीर्तिदेवी को लेकर चारों धाम की यात्रा पर निकले थे। 92 वर्ष की मां को कांवड़ में बिठाकर उन्होंने चारों धामों के अलावा नर्मदा यात्रा, ज्योतिर्लिंग की परिक्रमा करा दी है। अब वे वृंदावन से लौटकर उनकी यात्रा पूरी होगी।
मां कीर्तिदेवी ने बताया कि, बचपन में कैलाश पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।

उस वक्त मैंने मुराद मांगी कि बेटे के ठीक होने पर चार धाम की तीर्थ यात्रा करूंगी। जिसके बाद ठीक हो गया। जब कैलाश को मांग की उस प्रतिज्ञा का पता चला, तो उन्हें वह खुद कंधे पर बिठाकर श्रवण कुमार की तरह तीर्थ कराने निकल पड़े। बुजुर्ग मां कैलाश को ईश्वर का वरदान मानती हैं।

Source: khaskhabar

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