गर्मियों में पेट दुरूस्त रखते हैं ये घरेलू मसाले

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Health-benefits-of-indian-spiceगर्मियां शुरू होते ही अपच और उल्टी होना आम बात है। चिलचिलाती धूप से बचने के लिए अक्सर हम बोतल बंद शीतल पेय का सहारा लेते हैं। मगर ये सिर्फ कुछ देर के लिए ही राहत पहुंचाते हैं। प्राचीन समय में आजकल की तरह बिकने वाले शीतल पेय का नामोनिशान नहीं था। फिर भी लोग स्वस्थ जीवन जीते थे। कारण सिर्फ इतना था कि वे प्राकृतिक पेय का प्रयोग करते थे।

ज्यादातर भारतीय रसोईघर में कई प्राकृतिक औषध से उपलब्ध होते हैं। इनका इस्तेमाल प्राचीन समय में दवाइयों के रूप में किया जाता है। इन औषध के जूस को सब्जियों में डाला जाता हैं ताकि पाचन तंत्र सही रह सके। ऐसे ही कुछ प्राकृतिक औषध को अपने किचन में जरूर जगह दें ताकि इन गर्मियों में अपना पाचन तंत्र आपको परेशान न करें।

पुदीना- प्राकृतिक पाचकों में पुदीना ऐसा औषध हैं जिसका प्रयोग हर भारतीय व्यंजन में किया जाता हैं। पुदीने में कई गुण मौजूद हैं, जो हमें स्वस्थ रखते हैं। पुदीने को अदरक और नमक के साथ मिलाकर खाने से आपके भोजन का स्वाद बेहतर हो सकता है। यह गर्मी में उल्टी या मितली से भी राहत देता हैं। सब्जियों पर पुदीने को बारीक काटकर डालें। यह पाचन क्रिया को दुरूस्त कर आपके पेट को ठंडा करता है। गैस की समस्या भी दूर करने में पुदीना कारगर हैं। पुदीने की चटनी खाने से लगातार आ रही हिचकी में आराम मिलता है।

अजमोद (पारसले)- गर्मियों में ज्यादातर पेशाब में समस्या और संक्रमण आम बात हैं। ऐसी स्थिति में यह हर्ब संक्रमण रोकने में मदद करता है। यह गुर्दे में एसिड़ को संतुलित रखता हैं जिससे शरीर में सूजन और पानी जमा नहीं होता। यह हर्ब गुर्दे में पथरी बनने से भी रोकता हैं। पेशाब के प्रवाह को सामान्य बनाकर गुर्दे की रक्षा करता है।

तुलसी- तुलसी का पौधा हर भारतीय के घर में मिल जाता हैं। वैसे भी तुलसी का प्रयोग बेहद ही शुभ माना जाता है। पूजा-पाठ में काम आने वाली तुलसी सेहत के लिए अच्छी है। यह आपके सब्जियों के रस को और भी फायदेमंद बनाती हैं। तुलसी का पत्ता खाली पेट लेना बेहद फायदेमंद है। खासकर तब जब इसे नींबू और अदरक के साथ लिया जाए। यह पाचन क्रिया को दुरूस्त कर कब्ज में भी राहत देता है।

घृत कुमारी (एलोवेरा)- गर्मियों में चिलचिलाती धूप हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। साथ मे रैशेज भी हो जाते हैं। घृत कुमारी रस त्वचा पर लगाने से रैशेज में आराम मिलता है और यह त्वचा का तेजी से पुननिर्माण करता है। घृतकुमारी का रस आंतों और यकृत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह शरीर के विषैले पदार्थ को बाहर निकालता हैं और पाचन क्रिया को भी दुरूस्त बनाता है।

दुग्ध रोम (मिल्क-थीसल)- इस औषध को सिलीमरीन भी कहा जाता हैं। यह यकृत को स्वस्थ रखते हैं और खून को साफ करने में मदद करता है। इसके सूखे पत्ते पेट के कीड़ों को दूर करता हैं। ज्यादा शराब का सेवन करने वालों को अक्सर यकृत की समस्या होती है। ऐसे में यह औषध फायदेमंद है। बहुत ज्यादा दर्द निवारक दवाइयों का इस्तेमाल करने वाले लोग इस हर्ब के साथ घृतकुमारी के रस का इस्तेमाल कर सकते हैं अपने यकृत को स्वस्थ रखने के लिए।

हल्दी- हल्दी हर घर में रोजमर्रा के खाने में इस्तेमाल होती हैं। हडि्डयों की समस्या और जोड़ो के दर्द से बचाती है। अगर आप हल्दी को दवा की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं तो कच्ची हल्दी का टुकड़ा पीस कर दूध में मिलाकर रात में पीएं। कच्ची हल्दी के टुकड़े सब्जियों के सूप में मिलाकर पीना फायदेमंद है। हल्दी में बेहतरीन रोगाणुरोधक क्षमता भी है।

Source: shiromaninews

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