हर गाँव और शहर में पाया जाने वाला ये चमत्कारी पौधा सेंकडो बीमारी को चुटकी में ठीक करता है

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अश्वगंधा  का स्थान प्राचीन भारतीय चिकित्सा, आयुर्वेद में, काफी महत्वपूर्ण रहा है। यह सदियों से इस्तेमाल होती आ रही जड़ी बूटी है अश्वगंधा के पौधे और इसके औषधीय गुणों का वर्णन पारंपरिक चीनी चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों में व्यापक रूप से किया गया है। अश्वगंधा को भारतीय जिनसेंग के रूप में भी जाना जाता है।

अश्वगंधा का मतलब है घोड़े की गंध। इसका यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी जड़ों में से गंध ऐसी होती है जैसे घोड़े के पसीने की गंध। इस जड़ीबूटी का प्रारंभ भारत में हुआ और यह शुष्क क्षेत्रों में सबसे अच्छी बढ़ती है। यह एक मज़बूत पौधा है जो बहुत उच्च तापमान और कम तापमान दोनों में जीवित रह सकता है – 40 डिग्री सेल्सियस से 10 डिग्री सेल्सियस तक के अंतर में भी जीवित रहता है। अश्वगंधा समुद्र स्तर से समुद्र तल के ऊपर 1500 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है

अश्वगंधा के हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदे

अश्वगंधा, अपने सूजन कम करने के गुण, एंटी ऑक्सीडेंट और तनाव कम करने के गुणों के साथ, हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं के लिए अच्छा है। यह हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है यह रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नीचे लाता है

अश्वगंधा के फायदे कैंसर के लिए

एक शोध अध्ययन ने कैंसर को खत्म करने के लिए ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में, विकिरण चिकित्सा और रसायन चिकित्सा के साथ सहयोग में, अश्वगंधा को एक उभरता हुआ विकल्प बताया है यह ट्यूमर सेल को खत्म करने की गतिविधि के साथ बिना हस्तक्षेप किए कीमोथैरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए जाना जाता है

अश्वगंधा का डिप्रेसन में असर

भारत में अश्वगंधा पारंपरिक रूप से आयुर्वेद में, दोनों शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए इस्तेमाल किया गया है मानसिक स्वास्थ्य पर अश्वगंधा के प्रभाव को, विशेष रूप से अवसाद(डिप्रेसन) में, अध्ययन किया गया है इस अध्ययन ने चिंताऔर अवसाद के संबंध में अश्वगंधा के लाभों का समर्थन किया है।

अश्वगंधा के तनाव विरोधी गुण

अश्वगंधा में तनाव विरोधी गुण भी माने जाते हैं। परंपरागत रूप से, यह एक व्यक्ति पर सुखद और शांत प्रभाव देने के लिए प्रशासित किया जाता था। वह सक्रिय संघटक जो इस गतिविधि के लिए ज़िम्मेदार है वह अभी भी अज्ञात है अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि अश्वगंधा के प्रयोग से चरम तापमान बदलाव में रखे पशुओं के तनाव के स्तर में उल्लेखनीय कमी आई।

अश्वगंधा के लाभ संधिवात के लिए 

अश्वगंधा संधिवात की समस्याओं के लिए प्रभावी पाया गया है। यह जड़ी बूटी सूजन और दर्द को कम करने के लिए जानी जाती है। काइरोप्रेक्टर्स के लॉस एंजिल्स कॉलेज द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि अश्वगंधा में सूजन कम करने के गुण हैं जो अल्कलाइड्स, सपोनिंस और स्टेरॉइडल लैक्टोन्स से आते है जो इसके भीतर पाए जाते हैं।

अश्वगंधा के बैक्टीरिया के संक्रमण में लाभ

आयुर्वेदिक चिकित्सा ग्रंथों के अनुसार, अश्वगंधा मानव में बैक्टीरिया के संक्रमण को नियंत्रित करने में प्रभावी है। अश्वगंधा में पारंपरिक धारणा के अनुसार जीवाणुरोधी गुण हैं और मौखिक रूप से इसके सेवन किए जाने पर यह मूत्रजनन, जठरांत्र और श्वसन तंत्र के संक्रमण में प्रभावी है।

अश्वगंधा है घाव भरने में उपयोगी

यह घाव भरने और उसके इलाज के लिए बहुत उपयोगी है। अश्वगंधा की जड़ों को पीस कर पानी के साथ एक चिकना पेस्ट बना लें। राहत के लिए घावों पर इस पेस्ट को लगाएं।

अश्वगंधा का लाभ प्रतिरक्षा प्रणाली में

शोध अध्ययनों से पता चला है कि अश्वगंधा का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाता है। यह भी देखा गया कि अश्वगंधा के सेवन से चूहों की लाल रक्त कोशिका और सफेद रक्त कोशिका में भी वृद्धि हुई। इससे यह माना जा सकता है कि आदमी की लाल रक्त कोशिकाओं पर अश्वगंधा के सेवन से सकारात्मक प्रभाव हो सकता है, जिससे एनीमिया जैसी स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है। (और पढ़ें – एनीमिया के लक्षण)

अश्वगंधा है मधुमेह का इलाज 

अश्वगंधा लंबे समय से आयुर्वेदिक चिकित्सा में मधुमेह के लिए एक उपाय के रूप में इस्तेमाल किया गया है। मधुमेह के उपचार में अश्वगंधा के उपयोग पर अनुसंधान ने सकारात्मक परिणाम का संकेत दिया है। प्रयोगों ने दर्शाया कि जब अश्वगंधा चार सप्ताह की अवधि के लिए लिया गया, तब उपवास और दोपहर के खाने के बाद रक्त शर्करा के स्तर में काफी कमी आई।

अश्वगंधा में हैं कामोद्दीपक गुण

यह व्यापक रूप से कई शताब्दियों से माना गया है कि अश्वगंधा में कामोद्दीपक गुण है और लोगों ने इसे एक दवा के रूप में इस्तेमाल किया ताकि उनकी जीवन शक्ति और प्रजनन क्षमता में सुधार हो अश्वगंधा एक कामोद्दीपक दवा के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और अच्छी तरह से वीर्य की गुणवत्ता में सुधार लाता है। यह पूरे शरीर में तनाव भी कम कर देता है।

अश्वगंधा का फायदा थायराइड के लिए

हाइपोथायरायडिज़्म के मामलों में, अश्वगंधा थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। थायरॉयड ग्रंथि पर अश्वगंधा के प्रभाव पर एक अध्ययन से पता चला है कि इसकी जड़ों का एक्सट्रैक्ट, अगर एक दैनिक आधार पर लिया जाए, तो थायराइड हार्मोन के स्राव में वृद्धि होगी।

अश्वगंधा का लाभ चयापचय में

अश्वगंधा एंटीऑक्सिडेंट का एक बहुत अच्छा स्रोत है। ये एंटीऑक्सीडेंट चयापचय की प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न मुक्त कण को साफ और निष्क्रिय करने में बहुत प्रभावी रहे हैं।

अश्वगंधा का उपयोग मांसपेशियों की शक्ति में सुधार लाने के लिए

अश्वगंधा निचले अंगों की मांसपेशियों की शक्ति में सुधार लाने और कमज़ोरी दूर करने में उपयोगी पाया गया है। यह मस्तिष्क और मासपेशियों के बीच समन्वय पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

अश्वगंधा का उपयोग मोतियाबिंद से लड़ने में

त्यागराजन एट अल द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि अश्वगंधा के एंटीऑक्सीडेंट और साइटोप्रोटेक्टिव गुण मोतियाबिंद रोग से लड़ने में अच्छे हैं।

अश्वगंधा का फायदा त्वचा की समस्या के

अश्वगंधा श्रृंगीयता के इलाज के लिए उपयोगी है जिसके कारण सख्त और रूखी त्वचा होती है। इस त्वचा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए दिन में दो बार पानी के साथ अश्वगंधा के तीन ग्राम लें। त्वचा को युवा रखने के लिए यह कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देता है और प्राकृतिक त्वचा तेलों की वृद्धि में मदद करता है। अश्वगंधा में उच्च स्तर के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो झुर्रियों, काले धब्बे जैसे उम्र बढ़ने के संकेतों से लड़ने में सहायक हैं। अश्वगंधा त्वचा कैंसर से भी बचाता है।

अश्वगंधा का फायदा बालों के लिए

अश्वगंधा शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को कम करके बालों के गिरने को नियंत्रित करता है। अश्वगंधा बालों में मेलेनिन की हानि को रोक कर समय से पहले बालों के ग्रे होने को रोकता है। अश्वगंधा में टाइयरोसीन है जो एक एमिनो एसिड है और शरीर में मेलेनिन के उत्पादन को उत्तेजित होता है।

अश्वगंधा के नुकसान

गर्भवती महिलाओं को अश्वगंधा का सेवन ना करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें गर्भ गिराने वाले गुण हैं।

अश्वगंधा का उपयोग करते समय डॉक्टर सावधानी रखने की सलाह देते हैं क्योंकि अश्वगंधा सामान्य रूप से ली जा रही दवाइयों के साथ हस्तक्षेप कर सकता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो मधुमेह, हाई बीपी, चिंता, अवसाद और अनिद्रा जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं।

बड़ी मात्रा में अश्वगंधा की खपत से बचें क्योंकि ऐसा करने पर दस्त, पेट की ख़राबी और मतली जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

अश्वगंधा का सेवन कैसे करे 

अश्वगंधा जड़ बाजार में या तो पाउडर के रूप में, सूखे रूप में, या ताज़ा जड़ के रूप में उपलब्ध है।

आप 10 मिनट के लिए पानी में अश्वगंधा पाउडर को उबालकर अश्वगंधा की एक चाय बना सकते हैं। पानी के एक कप में पाउडर के एक चम्मच से अधिक प्रयोग न करें।

आप सो जाने से पहले अश्वगंधा जड़ पाउडर गर्म दूध के एक गिलास के साथ भी ले सकते हैं

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