शाकाहार है अहिंसा मूलक और स्वास्थप्रद

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शाकाहार है अहिंसा मूलक और स्वास्थप्रद

आहार सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है, जिसका व्यक्ति निर्माण से घनिष्ठ सम्बन्ध है। सृष्टि का नियम है कि जैसा बीज धरती में बोया जाता है, वैसा ही फल मिलता है। कोई व्यक्ति बबूल के बीज बो कर आम के फल का स्वाद नहीं ले सकता। इसी प्रकार बीज रूप में जैसा आहार लिया जाता है, वैसे ही भाव-विचार और आचार होते हैं।

आहार दो प्रकार के है- शाकाहार और मांसाहार। शाकाहार अभहसामूलक है, तो मांसाहार हिसामूलक। शाकाहार स्वास्थ्यप्रद है, तो मांसाहार रोगों का घर, शाकाहार मानवीय और सौन्दर्यपरक आहार है तो मांसाहार आसुरी और विकृतिपरक, शाकाहार सात्विक है तो मांसाहार कालकूटविष, शाकाहार प्रकाश की ओर ले जाता है तो मांसाहार अन्धकार की ओर ले जानेवाला है।

शाकाहार ही वह सर्वोत्तम आहार है, जिसके साथ जीवन की गौरव गरिमा है। शाकाहार ही मानव के अन्दर संतोष, सादगी, सदाचार, स्नेह, सहानुभूति और समरसता जैसे चारित्रिक गुणों का विकास कर सकता है, मांसाहार कदापि नहीं।

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