दिल चुरा ले गई तेरी बिंदिया – बिंदिया है सुहाग का प्रतीक

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माथे पर चमकती बिंदिया सुहाग का प्रतीक मानी जाती है और नारी का श्रृंगार तभी संपूर्ण है जब माथे पर बिंदिया दमक रही हो। बिंदिया चिपकने वाली व लिक्विड दोनों रूपों में लगाई जाती है। गर्मियों में पसीने के कारण बिंदिया लगाना मुश्किल होता है पर सर्दियों में तो बिंदिया अपने दोनों रूपों में छटा बिखेरती है।

त्यौहारों और विशेष अवसरों पर तो बिंदी नारी सौंदर्य को दुगुना कर देती है। बिंदियों के भी विभिन्न डिजाइन प्रचलन में हैं और जिस प्रकार कपड़ों के डिजाईन बदलते हैं बिंदियाँ भी नए-नए रूपों में प्रचलन में हैं। अपने माथे के अनुरूप आप छोटी या बड़ी बिंदी का प्रयोग कर सकती हैं।
अगर आपका माथा छोटा है तो बहुत बड़ी बिंदी का प्रयोग न करें। 

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