10 दिनों में बड़े बड़े रोगों का रामबाण इलाज करता हैं ये चमत्कारी पौधा

Loading...
आगे पढने के लिए next बटन पर क्लिक करें
sadabahar-benefits

सदाबहार छोटा झाड़ीनुमा पौधा है। इसके गोल पत्ते थोड़ी लम्बाई लिए अंडाकार व अत्यंत चमकदार व चिकने होते हैं। एक बार पौधा जमने पर उसके आसपास अन्य पौधे अपने आप उगते जाते हैं। पांच पंखुड़ियों वाला पुष्प श्वेत, गुलाबी, फालसाई, जामुनी आदि रंगों में खिलता है। पत्ते व फल की सतह थोड़ी मोटी होती है। इसके चिकने मोटे पत्तों के कारण ही पानी का वाष्पीकरण कम होता है और पानी की आवश्यकता बहुत कम होने से यह बड़े मजे में कहीं पर भी चलता खिलता व फैलता है। इसके इन्हीं गुण के कारण पुष्प प्रेमियों ने इसका नाम नयन तारा या सदाबहार रखा। फूल तोड़कर रख देने पर भी पूरा दिन ताजा रहता है। मंदिरों में पूजा पर चढ़ाए जाने में इसका उपयोग खूब होता है।

रोगों में इसके प्रयोग के विषय में लिखा है। भारत में प्राकृतिक चिकित्सक मधुमेह रोगियों को इसके श्वेत फूल का प्रयोग सुबह खाली पेट करने की सलाह देते हैं। यह पौधा अपोनसाईनसियाई परिवार का है और कनेर, प्लूमेरिया फ्रैंगीपानी, सप्तपर्णीय करौंदा, ट्रेक्लोस्पमर्म, ब्यूमेन्शया ग्रैन्डीफ्लोरा, एलामंडाकथार्टिका जैसे अत्यंत भव्य लोकप्रिय झाड़ियां, वृक्ष व लताएं इसी परिवार से संबंधित हैं। इस परिवार के पौधों की विशेषता इसे तोड़ने पर उसमें से बहने वाला श्वेत चिपचिपा गाढ़ा लेसदार तरल पदार्थ है।

सदाबहार के घरेलू उपचार

1 त्वचा पर घाव या फोड़े-फुंसी हो जाने पर आदिवासी इसकी पत्तियों का रस दूध में मिला कर लगाते हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से घाव पक जाता है और जल्द ही मवाद बाहर निकल आता है।

2  सदाबहार ( सदाफूली ) की तीन चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग से राहत मिलती है। आधे कप गरम पानी में सदाबहार ( सदाफूली ) के तीन ताज़े गुलाबी फूल 05 मिनिट तक भिगोकर रखें। उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें। यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें। अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ।

3 पत्तियों को तोड़ने पर निकलने वाले दूध को खाज-खुजली में लगाने पर जल्द आराम मिलने लगता है। दूध को पौधे से एकत्र कर प्रभावित अंग पर दिन में कम से कम दो बार लेप किया जाना चाहिए।

4  सदाबहार ( सदाफूली ) के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें। इससे मधुमेह मिटता है। यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए।

5  इसकी पत्तियों को तोड़े जाने पर जो दूध निकलता है, उसे घाव पर लगाने से किसी तरह का संक्रमण नहीं होता और घाव जल्दी सूख भी जाता है।

6  पत्तियों और फूलों को कुचलकर बवासीर होने पर इसे लगाने से तेजी से आराम मिलता है। आदिवासी जानकारों के अनुसार, ऐसा प्रतिदिन रात को सोने से पहले किया जाना ठीक होता है।

7  सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को मुहांसों पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे निजात मिल जाती है। पत्तियों और फूलों को पानी की थोड़ी सी मात्रा में कुचल कर लेप को मुहांसों पर दिन में कम से कम दो बार लगाने से जल्दी आराम मिलता है।

8  इसकी पत्तियों के रस को ततैया या मधुमक्खी के डंक मारने पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है। इसी रस को घाव पर लगाने से घाव भी जल्दी सूखने लगते हैं। त्वचा पर खुजली, लाल निशान या किसी तरह की एलर्जी होने पर पत्तियों के रस को लगाने पर आराम मिलता है।

Please Share! Sharing is Caring!

आगे पढने के लिए next बटन पर क्लिक करें

Loading...

Next post:

Previous post:

x
Please "like" us: